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Kabirdas Ki Sakhiyan

Kabirdas Ki Sakhiyan

Kabirdas Ki Sakhiyan

Yayınevi : Bhartiya Sahitya Inc.
  • Satın aldığım e-kitaplarımı nasıl okurum?
  • | Barkod : 9781613013458 | Format : Epub

साखियां यों तो सभी संतों की निराली हैं। एक-एक शब्द उनका अन्तर पर चोट करता है। पर कबीर साहब की साखियों का तो और भी निराला रंग है। वे हमारे हृदय पर बड़ी गहरी छाप छोड़ जाती हैं। सीधे-सादे अनपढ़ आदमी पर तो और भी अधिक ये साखियां अपना अमिट प्रभाव शायद इसलिए डाल जाती हैं कि उन्हीं की तरह एक अनपढ़ संत ने सहज-सहज जीवन को पहचाना था और उसके साथ एकाकार हो गया था। दूसरों के मुख से सुनी उसने कोई बात नहीं कही, अपनी आंखों-देखी ही कही। जो कुछ भी कहा अनूठा कहा, किसी का जूठा नहीं

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